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योग फ्रन्ट संस्था

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योग फ्रन्ट संस्था
ਯੋਗ ਫ੍ਰੰਟ ਸੰਸਥਾ
Yog Front Organization
Yog Front.png
योग फ्रन्ट संस्था का चिह्न
FormationApril 23, 2020; 17 months ago (2020-०४-23)
Founderयोगाचार्य विनय पुष्करणा
Founded atकादियां भारत
Merger ofअखिल भारतीय योग चिकित्सक संघ
पुष्करणा रिसर्च एसोसिएशन फॉर नैच्रल ऐड
Typeगैर-लाभकारी संगठन|गैर-लाभकारी
Registration no.PB/2021/0290185 [१]
Purposeमानवाधिकार,सशक्तिकरण, शिक्षा, योग , रोजगार, अनुसंधान, प्रकाशन, चिकित्सा, खेल
अध्यक्ष
रोशन कुमार पाठक
उपाध्यक्ष
विकास शर्मा
महासचिव
रूपा रावत
कोषाध्यक्ष
पूजा तिवारी
Key people
नेहा
इरविंदर कौर
राखी त्यागी
भूषण महेश्रे
अमनदीप कौर
विपनदीप थापर
डिम्पल रानी
सुधा भाटिया
Affiliationsभारत सरकार नीति आयोग नेहरू युवा केंद्र संगठन फिट इंडिया
Websiteyogfront.ooo
Formerly called
योग फ्रन्ट
YogFront Round Logo.png

योग फ्रन्ट संस्था[२] वर्ष 2020 के आरंभ मे बनी। यह संस्था आरंभ मे पंजाब प्रांत के एक छोटे से नगर कादियां से आरंभ हुई जिसका उद्देश्य योग के क्षेत्र मे एक विश्वसनीयता एवं नियमावली लाना था। आरंभ मे संस्था ने योग के क्षेत्र मे भरपूर जानकारी एकत्रित करने के लिए भारत सरकार से जानकारी के अधिकार अधिनियम 2005 के माध्यम से जानकारी मांगी उसके उपरांत संवाद करते हुए बातों को आगे बढ़ाया। जिसमे योग के क्षेत्र मे आ रही अड़चने और अव्यवस्थित ढांचे को ध्यान अधीन रखा गया। समस्याओं का समाधान ढूंढते और भी लोग जुड़े जो योग के शिक्षा प्राप्त थे परंतु बेरोजगार थे। जिनकी बेरोजगारी का कारण गलत नीतियाँ और कुछ पूँजीपतियों का इस क्षेत्र पर कब्जा जमाना था। इसको ध्यान मे रखते हुए यह संस्था वर्ष 2021 मे पूर्ण भारत मे कार्य करने के लिए आगे बड़ी और भारत से कई योग के बेरोजगार सदस्य जुडने शुरू हो गए। योग शिक्षकों, योग साधकों, योग प्रेमियों की यह संस्था योग फ्रन्ट कुटुंब के माध्यम से योग को घर घर भी पहुंचाने का कार्य कर रही है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्था की नीति है कि केवल उच्चशिक्षा प्राप्त योगशिक्षको को न्याय दिलाना मात्र ही हमारा कार्य नहीं अपितु उनके माध्यम से जन कल्याण करना भी हमारा कर्तव्य है इसी नीति पर योग फ्रन्ट संस्था पिछले एक वर्ष से कार्य कर कई समाज और जनकल्याण के कार्यक्रम भी आयोजित करती आ रही है।

संस्था के बारे मे[स्रोत सम्पादित करें | hide | hide all]

यह संस्था भारत स्तर पर 2021 मे अस्तित्व मे आए इससे पूर्व यह राज्य स्तर पर कार्य कर रही थी। सर्वप्रथम संस्था एक आंदोलन के रूप मे विकसित हुए जिसे लॉकडॉन के समय मे जालस्थल के माध्यम से संचालित किया गया। राज्यस्तर पर संस्था के कार्यों को संचालित करने हेतु अमनदीप कौर और डिम्पल रानी ने संस्था के अध्यक्ष वं उपाध्यक्ष पद पर कार्य किया। समय के साथ संस्था के साथ और लोग जुडते गए और संस्था जो की योग फ्रन्ट के नाम से पंजीकृत पंजाब राज्य मे कार्य कर रही थी धीरे धीरे पूरे भारत मे कार्य करते हुए योग फ्रन्ट संस्था के नाम से पंजीकृत हुई। संस्था भारत सरकार के अधिनियम 1860 के अंतर्गत तो पंजीकृत है ही साथ ही साथ भारत सरकार के अन्य विभागों द्वारा भी पंजीकृत है जिसमे फिट इंडिया, नीति आयोग, नेहरू युवा केंद्र संगठन आदि भी शामिल हैं। संस्था न केवल रोजगार के लिए लड़ रही है अपितु रोजगार और योग शिक्षकों से सशक्तिकरण पर भी कार्य कर रही है जिसकी जानकारी उनके जालस्थल पर दी हुई है जिसमे कई परियोजनाओं के माध्यम से योग शिक्षकों को जोड़ा जा रहा है और उनको सशक्त किया जा रहा है।

स्लोगन (ध्येयवाक्य)[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था द्वारा चयन किया गया स्लोगन ऋगवेद के मण्डल 10 सुकत् 191 श्लोक 4 से लिया गया है जो इस प्रकार है
समानी व आकूति: समाना हृदयानि व: समानवस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति। - ऋग्वेद 10/191/4 [३]
जिसका अर्थ है एक हमारा उद्देश्य हो, सुसंगत हमारी भावना हो। एकत्रित हमारे विचार हो, जैसे सब कुछ इस विश्व में एकता में है

अगर हम स्लोगन की ही बात करें तो यह आलोगन ऋगवेद के एक श्लोक से जो न केवल जुडने की बात बताता है अपितु योग का सारांश भी इसी मे सिममलित है। इसी श्लोक के अन्य अंग कानून की और मानवाधिकार की व्याख्या भी करते हैं अतः यह शलोक अपने आप मे योग फ्रन्ट संस्था के कार्य, निश्चय और नीति को दर्शाता हुआ वैदिक साक्ष्य है। अतः इसी कारण बताया जाता है कि संगठन ने इसे अपने संगठन का ध्येयवाक्य बनाया है।

पंजीकरण[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था के निर्माण मे संस्थापक वं अन्य सदस्यों द्वारा नियमों और कानूनों का बहुत बारीकी से ध्यान देते हुए प्रत्येक कार्य आरंभ करने से पूर्व जरूरी दस्तावेजों और अनुमति पत्रों पूर्ण करते हुए पंजीकरण कार्य को बहुत ध्यान से पूर्ण किया गया। प्राप्त जानकारी अनुसार संस्था निम्नलिखित विभागों और संस्थाओं से पंजीकृत है और कुछ संस्थाओं से संधि भी कर चुकी हैं:-

  1. संस्था भारत सरकार अधिनियम 1860 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर एक पंजीकृत संस्था है
  2. संस्था भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा 2021 मे पंजीकृत हुई
  3. वर्ष 2021 मे ही संस्था भारत के सबसे बड़े युवा संगठन नेहरू युवा केंद्र संगठन का हिस्सा बनी
  4. संस्था भारत सरकार के खेल विभाग द्वारा संचालित फिट इंडिया मुहीम का हिस्सा है तथा उनके द्वारा भी प्रमाणित है
  5. संस्था द्वारा 2021 मे आईएसएसएन द्वारा पंजीकरण प्राप्त करने हेतु आवेदन किया गया
  6. संस्था ने 2021 मे भारत की 2 अफिलीएट कॉम्पनीयों से हाथ मिला कर कार्य आरंभ किया

संस्थापक[स्रोत सम्पादित करें | hide]

Founder Yog Front

योग फ्रन्ट को बनाने वाले योगाचार्य विनय पुष्करणा हैं जो कि पंजाब प्रांत के रहने वाले बहुत ही विनम्र एवं मधुर स्वभाव के व्यक्ति हैं, उन्होंने योग के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत कार्य किया और वह प्रथम ऐसे योगाचार्य हैं जिन्होंने प्रथम योग दिवस पर अहमदिया मुस्लिम जमात के हजारों लोगों को रोज़ों के दिन भी योग करवाया। जिस कार्यक्रम मे बीजेपी नेता अविनाश राय खन्ना स्वयं उपस्थित थे और इस कार्यक्रम का प्रसारण कई राष्ट्रीय वं अन्तराष्ट्रिय समाचार चैनल्स पर हुआ। यही नहीं उनके द्वारा समय समय पर जनकल्याण हेतु कई शिविर सेवा भाव से लगाए जाते हैं।
योग फ्रन्ट संस्था को बनाने के पीछे वो अपना उद्देश्य बताते हैं कि कुछ पूंजीपति तथा कुछ अधिकारी योग के क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाने मे लगे हैं जिस के कारण योग मे पढे लिखे योग शिक्षक बेरोजगार है और अधिकारियों द्वारा उनका शोषण किया जा रहा है, जो कि बहुत ही अनैतिक और शर्मसार है। जिसको देख कर उन्होंने योग शिक्षकों के हितों के लिए लड़ाई लड़ने का फैसला किया और इस संगठन का निर्माण किया। योगाचार्य विनय पुष्करणा के बारे मे अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके बीते समय पर अगर ध्यान दें तो, वह योग मे 2002 मे आए जब वह एक पाठशाला मे एक छात्र थे 2007 मे उन्होंने योग मे डिप्लोमा किया उसके पश्चात योग मे स्नातक और उसके उपरांत स्नातकोतर की शिक्षा प्राप्त कर वह कई प्रतिष्ठित संस्थानों मे कार्य कर चुके हैं। उन्होंने 2011 से 2013 तक पंजाब प्रांत के एक प्रतिष्ठि आयुर्वेद शैक्षिक संस्थान जिसका नाम श्री लक्ष्मी नारायण आयुर्वेदिक कॉलेज और हस्पताल है वहाँ बतौर योग चिकित्सक कार्य किया। इसके साथ साथ उन्होंने कई समाज कल्याण के कार्यों मे योगदान दिया जिसमे उनके योग शिविर और निशुल्क चिकित्सक परामर्श मुख्य हैं। और संस्था मे योगशिक्षकों के कल्याण हेतु नई से नई परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं जिसमे बापू, अपराजय, आयशा, दिया, उदय जैसे कार्यक्रम वं परियोजनाएं उनकी देन हैं। योग, आयुर्वेद के इलावा अगर देखें तो उनको टेक्नॉलजी और संगणक का भी भरपूर ज्ञान है और योग फ्रन्ट संस्था तथा इससे पूर्व विप्र संस्था, पुष्करणा रिसर्च एसोसिएशन फॉर नैच्रल ऐड और क्रीडा भारती पंजाब जैसे अनेकों संगठनों को विनय पुष्करणा ने टेक्नॉलजी के आधार पर सहयोग दिया है।

अध्यक्ष[स्रोत सम्पादित करें | hide]

रोशन कुमार पाठक

इस संगठन के अध्यक्ष हरकेश नगर दक्षिणी दिल्ली के रहने वाले श्री रोशन कुमार पाठक है जो 23 फरवरी 2021 को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से चयनित होकर संगठन के प्रथम राष्ट्रीय स्तरीय अध्यक्ष चयनित हुए। रोशन पाठक जी योग विषय में स्नातकोतर हैं और राजनीतिक शास्त्र विषय में स्नातक की शिक्षा भी प्राप्त की है। इनके संगठन में आगमन के पश्चात कई कार्यों मे तीव्रता आई और उनके माध्यम से ही संगठन को प्रथम संरक्षक प्राप्त हुआ।
रोशन पाठक राजनीतिक शास्त्र के छात्र रहने के कारण एक अच्छे नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं और योग विषय स्नातकोतर के पश्चात योग मे अच्छी पकड़ रखते हैं अतः योग के क्षेत्र में एक स्करात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य किया है, जिसमे उनके द्वारा राजनैतिक संगठनों को संपर्क किया गया, मंत्रीगणों, विभागों में संपर्क व तमाम योग के जाने माने विद्वान जनो व संगठनो के समक्ष योग शिक्षकों की समस्याओं की बात रखी है।
भविष्य में योग शिक्षकों को रोजगार को लेकर समस्याओं का सामना न करना पड़े इस लिए योग फ्रन्ट संस्था की पूरी टीम योग के क्षेत्र में कानून लाने की मांग को प्राथमिकता से उठा रही है जिसके के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं व संस्था के अध्यक्ष रूप में में यह प्रयास एक रणनीति के अनुसार इनके मार्गदर्शन में किए जा रहे हैं जिसमे सभी को उनकी योग्यता अनुसार रोजगार प्राप्त हो। अतः कुछ समय पूर्व ही रोशन कुमार पाठक एक अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का भी एक हिस्सा बने हैं और जिसके माध्यम से भी वह योग के क्षेत्र मे एक क्रांति लाने के लिए कार्य कर रहें हैं।

योग फ्रन्ट समितियाँ, विभाग और सदस्य[स्रोत सम्पादित करें | hide]

योग फ्रन्ट संस्था के विभागों और सदस्यों की बात करें तो 21 मई 2021 तक प्राप्त संस्था के सदस्यों की जानकारी इस प्रकार है:-

संस्था की समितियाँ और सदस्य
सदस्य का नाम समिति सदस्य का नाम समिति
योगाचार्या ज्योति मिश्रा सलाहकार डॉक्टर कुलदीप मलिक संरक्षक
युगदीप मिश्रा मानवाधिकार डॉक्टर कमल ज्योति संरक्षक
योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा मानवाधिकार गीता शर्मा संरक्षक
योगाचार्य राम प्रकाश मानवाधिकार योगाचार्य राकेश भारद्वाज मानवाधिकार
यशोदा राजपूत सलाहकार ज्योति गुप्ता सलाहकार
ज्योति गुप्ता सलाहकार योग राज शर्मा सलाहकार
संस्था के विभाग तथा अधिकारी
सदस्य का नाम विभाग सदस्य का नाम विभाग
योगाचार्या इरविंदर कौर सांस्कृतिक योगाचार्या सुधा भाटिया पर्यटन
योगाचार्या नेहा तकनीकी राखी त्यागी प्रशासनिक
योगाचार्या अमनदीप कौर उदय योगाचार्या डिम्पल रानी एस आर यू
योगाचार्य विपन थापर आएषा योगाचार्य भूषण महेश्रे डिजिटल प्रमोशन
अभिषेक भट्टी कानूनी सलाहकार गौतम सिंह वित्तीय सलाहकार
मोहन लाल अरोड़ा उदय स्वीटी शर्मा सांस्कृतिक

उपरोक्त तालिका अनुसार योग फ्रन्ट संस्था के कुछ विभाग और कुछ समितियों की जानकारी प्राप्त होती है यह जानकारी 21 मई 2021 के पूर्व की है। एक जानकारी अनुसार पता चला की योग फ्रन्ट संस्था इसके इलावा भी अन्य कई विभागों और समितियों पर कार्य कर रही है जिसकी जानकारी का कुछ भाग संगठन की वेबसाईट पर उपलब्ध है। योग फ्रन्ट संस्था सदस्यों की योग्यता, शिक्षा, क्षमता, ज्ञान के स्तर पर केन्द्रीय सदस्यों का चयन करती है जो उनके जिला और राज्य स्तर पर किए कार्यों को देखते हुए बनते हैं। योग फ्रन्ट संस्था मे सबसे प्रथम स्तर योग फ्रन्ट कुटुंब का है जहां योग फ्रन्ट संस्था मे आसानी से जुड़ा जा सकता है इसके माध्यम से योग विशेषज्ञ और योग प्रेमी दोनों की एक परिवार का हिस्सा बनते हैं। योग फ्रन्ट कुटुंब के पश्चात योग विशेषज्ञों को आगे बढ़ाते हुए उनको कार्य और पद प्रदान किए जाते हैं जिसके मूल्यांकन के पश्चात सदस्य राज्य स्तर पर चयनित होते हैं।

संस्था के मुख्य कार्य[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था वैसे तो बहुत सारे कार्य कर चुकी है और निरंतन कर रही है जिसमे सरकार से वार्तालाप और संवाद भी शामिल है परंतु इसके साथ साथ लोगों को जागरूक करना और योग के प्रति लोगों को ज्ञान देना और उनको योग से जोड़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्य भी किए जा रहे है जिनमेसे कुछ कार्यों की सूची नीचे उपलब्ध है।

दिल्ली सरकार को ज्ञापन[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था द्वारा दिल्ली सरकार को योग क्षेत्र मे पढे लिखे योग विशेषज्ञों की भर्ती तथा उनसे न्याय की मांग करते हुए योग को दिल्ली शिक्षा बोर्ड मे एक मुख्य विषय के रूप मे रखा जाए इसकी मांग को उठाते हुए पत्र दिया गया। दिल्ली सरकार के विधायक ने इस पर सरकार से मांग भी की इस बात को जल्द से जल्द सुना जाए और इसके लिए कोई कार्य योजना बनाई जाए। [४]

आयुष वार्ता[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था द्वारा भारत मे पहली बार एक ऐसा कार्यक्रम चलाया गया जिसमे सभी भारतीय चिकित्सा प्रणालियों से लोगों को रूबरू करवाया गया, जिसमे भारत के संबधित विषय के सभी प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से विशेषज्ञों को बुलाया गया और उनके द्वारा लोगों को जागरूक किया गया कौनसी पद्दती कैसे कार्य करती हैं और कहाँ कहाँ उपलब्ध है। यह कार्यक्रम कई विभागों द्वारा सराहा गया। [५]

आई पलेज़[स्रोत सम्पादित करें | hide]

संस्था द्वारा आई पलेज़ नाम की एक परियोजना चलाई गई जिसके माध्यम से पूरे भारत मे योग को जीवन का अभिन बनाने की शप्त दिलाई साथ ही साथ यह भी शप्त दिलाई की योग को योग मे उच्चशिक्षा प्राप्त योग शिक्षकों के माध्यम से ही करेंगे और योग के क्षेत्र मे कानून आए इसकी मांग का हम समर्थन करते हैं। इस परियोजना मे लोगों ने अपना समर्थन देते हुए शप्त ग्रहण की और संस्था द्वारा उनको शप्त प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। [६]

योग कान्ति परियोजना[स्रोत सम्पादित करें | hide]

योग फ्रन्ट द्वारा योग मे कानून को ले कर एक बड़े स्तर पर मांग उठाई गई जिसका नाम योग कान्ति परियोजना रखा गया। इसी मांग को सरकार के अधिकारियों के पास ले कर जाया गया और की मंत्रियों और विधायकों के पास पहुंचाया गया। जिसके पश्चात सरकारी अधिकारियों द्वारा एक कनून को ले कर एक ड्राफ्ट बना कर देने के लिए कहा गया जिस पर योग फ्रन्ट संस्था के सभी अधिकारियों के कुछ वकीलों, योग विशेषज्ञों, पूर्व आईएएस अधिकारियों की मदद से एक ड्राफ्ट तयार किया और उसको सरकार तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। संस्था का कहना है कि अगर यह कानून पास हो जाता है कोई भी योग विशेषज्ञ भूखा नहीं मरेगा और सबको उनकी योग्यता अनुसार रोजगार और वेतन प्राप्त होगा। संस्था द्वारा यह भी बताया गया की छः क्षेत्रों मे योग को बांटा गया है जिसके माध्यम से इतने रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे कि नौकरियां अधिक होंगी परंतु योग शिक्षक काम पढ़ जाएंगे। [७]

विरोध एवं समस्याएं[स्रोत सम्पादित करें | hide]

जहां योग फ्रन्ट संस्था स्करात्मकता से आगे बढ़ रही है वहीं कुछ जगह योग फ्रन्ट संस्था को विरोध और समस्याओं का सामना भी करना पढ़ रहा है।

योग प्रमाणिकरण बोर्ड (आयुष मंत्रालय)[स्रोत सम्पादित करें | hide]

योग फ्रन्ट द्वारा बड़े स्तर पर यह बात रखी गई है कि योग सर्टिफिकेशन बोर्ड एक अनैतिक रूप से योग के क्षेत्र मे कार्य कर रहा है जिसमे पढे लिखे योग शिक्षकों का शोषण हो रहा है वहीं बिना योग मे अकादमी शिक्षा प्राप्त किए लोगों को जल्दी से योग के क्षेत्र मे स्थापित किया जा रहा है जिस पर संगठन द्वारा कई प्रकार के सवाल उठाए गए। जैसे

  1. इसके माध्यम से सरकारी अधिकारी पैसा इकठ्ठा करने मे लगे हैं
  2. इस विभाग के अधिकारियों तथा अन्य सदस्यों की योग मे क्या शिक्षा है?
  3. क्या इसी तर्ज पर आयुर्वेद, यूनानी, होमीओपैथी के विशेषज्ञ भी तयार होते हैं?
  4. बिना किसी नियुन्तम योग शिक्षा के आप कैसे उनको स्नातक वं स्नातकोतर शिक्षा प्राप्त लोगों के समान खड़ा कर सकते हैं?
  5. क्यों इसको नियमित रूप से थोपा जा रहा है
  6. इसके माध्यम से करोड़ों रुपये इकठे किए गए हैं उनकी जानकारी सांझा करें

संस्था द्वारा पूछे गए उपरोक्त सवालों पर कुछ लोगों ने यह दर्शाना और भ्रमित करना आरंभ कर दिया कि योग फ्रन्ट संस्था वाई सी बी (जो कि पूर्व मे क्यू सी आई था) के खिलाफ है और इस लिए सबको गुमराह कर रही है। जिसके पश्चात योग फ्रन्ट संस्था को सामने आते हुए अपना विचार स्पष्ट रखना पड़ा कि योग फ्रन्ट संस्था किसी प्रकार से वाई सी बी के खिलाफ नहीं है और न ही इसको बंद करवाना चाहती है बल्कि हम इसको सही मापदण्डः के साथ लाना चाहते हैं जिसके लिए हम कार्य कर रहे हैं। वर्तमान मे वं पहले से ही इस गलत मापदण्डः के कारण कई योग शिक्षकों को नुकसान उठाना पड़ा है अतः भविष्य मे भी ऐसे आगे आने वाले योग शिक्षकों के साथ न होता रहे इसको ध्यान मे रखते हुए योग फ्रन्ट योग कान्ति परियोजना के अंतर्गत सरकार से योग के क्षेत्र मे कानून की मांग कर रहा है। जिसमे उन्होंने वाई सी बी प्रमाणपत्र प्राप्त लोगों को भी स्थाई रोजगार देने की बात रखी है। जिसके पश्चात वाई सी बी सम्पन्न योग सहायक भी योग फ्रन्ट संस्था के साथ जुडने के लिए आगे आने लगे।

अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ[स्रोत सम्पादित करें | hide]

रेजिस्ट्रैशन सर्टिफिकेट महासंघ

बीते वर्ष योग फ्रन्ट संस्था के संस्थापक (जब योग फ्रन्ट संस्था एक राज्य स्तर पर कार्य कर रही थी) ने राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे एक योग समीकरण को सहयोग देते हुए योग फ्रन्ट संस्था के माध्यम से एक राष्ट्रीय स्तर के संगठन का निर्माण मे अपना योगदान दिया जिसका नाम अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ रखना तह हुआ था । जिसमे योग फ्रन्ट के वर्तमान सदस्यों ने काफी योगदान देते हुए संगठन को एक रूप रेखा और राष्ट्रीय स्तर पर पहिचान दी। नवंबर मे संस्थापक योग फ्रन्ट द्वारा योग के क्षेत्र मे कानून लाने की मांग को रखा गया जिसके पश्चात कुछ लोग उस मांग से सहमत हुए कुछ असहमत। सहमत पक्ष के सदस्यों ने इस मांग को आगे बढ़ाना आरंभ किया जिसका विरोध करते हुए अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के असहमत सदस्यों ने संगठन के अंदर संगठन बनाने के आरोप लगाए। इसी बीच अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के पंजीकरण की बात उठी तो सामने आया की इस नाम से कोई संगठन पंजीकृत ही नहीं है अतः जनवरी मे योग फ्रन्ट संस्था के सदस्य अपनी योग मे कानून की मांग को ले कर अलग हो गए। जिसका अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ ने बहुत विरोध किया और कई कार्यक्रम केवल योग फ्रन्ट संस्था के विपक्ष मे किए और योग फ्रन्ट संथा का नाम खराब करने के लिए प्रचार किया गया । योग फ्रन्ट संस्था द्वारा इसके विपक्ष मे कोई जवाब न देने पर कहा गया की उनके पास कोई जवाब नहीं है इस लिए छुप हैं। परंतु कुछ समय पश्चात ही अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के ही अन्य अधिकारियों ने महासंघ के अंदर ही विरोध जताया जिसके कारण कई सदस्यों को महासंघ का हिस्सा नहीं है यह बताया गया और कई सदस्य महासंघ छोड़ गए जिसका इल्जाम भी योग फ्रन्ट संस्था पर लगाया गया कि महासंघ के लोगों को तोड़ योग फ्रन्ट बनाया गया। इस बीच जब महासंघ छोड़ कर गए सदस्यों द्वारा महासंघ के पंजीकरण का मुद्दा उठाया गया तो अध्यक्ष द्वारा एक नकली पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रसारित किया गया, जिसके बारे मे बहुत देर बाद सचाई सामने आई, तो सामने आया की अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ नाम का कोई संगठन पंजीकृत ही नहीं है। और इसी कारण की लोग इस संगठन से बाहर जाने लगे जिसको बाद अप्रैल 2021 मे एक सेक्शन 8 कॉम्पनी के रूप मे पजीकृत करवाया गया तथा उसका नाम बदल कर abyogsms फाउंडेशन कर दिया गया। जिसके निर्देशक मंगेश त्रिवेदी वं मोनिका शर्मा बने, परंतु इसमे संगठन अध्यक्ष द्वारा सदैव आरोप लगाया गया योग फ्रन्ट के कारण लोग हमे छोड़ कर गए हैं और ऐसे ही कई आरोप उठाए गए जो बाद मे बेबुनियादी साबित हुए। [८]